रविवार, 8 अप्रैल 2012

रूप तुम्हारा...


रूप तुम्हारा

प्रिय
तुम्हारा रूप
चंदा की चाँदनी सा,
अनूप!
अमावस का पर्याय बने
तुम्हारे केश
सज गई तारों की बिंदिया
माथे के देश!
कमल-पांखुरी से है दो नयना
लूट ले गए मन का चयना
गाल गुलाबी अधर है लाल,
देह चाँदनी ऐसी,
जैसे कामरूप का जाल!
हँसी तुम्हारी प्यारी इतनी
जैसे धूप लगे अगहन की
रूप अनूठा लगे
"धीर"को
बात कहूँ मै मन की!

DHEERENDRA,"dheer"

29 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर वाह!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 09-04-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  2. सुंदरता का अद्भुत व सुंदर चित्रण करती अति सुंदर कविता ।

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  3. कमल-पांखुरी से है दो नयना
    लूट ले गए मन का चयना.....वाह वाह.. जय हो....

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  4. खूबसूरती का सुन्दर चित्रण...

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  5. 'हँसी तुम्हारी प्यारी इतनी
    जैसे धूप लगे अगहन की....

    सौन्दर्य रस में डूबी बहुत खुबसूरत रचना.
    सुन्दर प्रस्तुती .
    आभार

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  6. वाह वाह.................

    सुंदरता का सुंदर वर्णन धीरेन्द्र जी.....

    सादर.

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  7. अक्षरों के बीज डाले, शब्दों की फसल बोई
    हमने रबी के मौसम में, भावों की फसल बोई.

    वाह !!!!!!!!!! अनुपम श्रृंगार.......

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  8. "कमल-पांखुरी से है दो नयना
    लूट ले गए मन का चयना"
    अगर भाभी जी है तो ..................... !
    न तो ................................ ?
    अभी कुछ दिनों पहले ही आपकी शादी-सालगिरह थी........... !!

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  9. श्रृंगार रस में डूबी हुई कविता में सौंदर्य का बखूबी चित्रण किया है

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  10. आपके मन की बात हम तक तो पहुंची, ... उन तक ... ... ?

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  11. कमल-पांखुरी से है दो नयना
    लूट ले गए मन का चयना
    vaah kya baat hai......

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  12. बहुत सुन्दर उपमाओं से सजी रूप की सुंदरता!...एक एक पंक्ति में सुंदरता रची बसी है!....बहुत सुन्दर रचना....आभार!

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  13. अरे वाह: खुबसूरती का खुबसूरत चित्रण...बहुत सुन्दर...

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  14. कमल-पांखुरी से है दो नयना
    लूट ले गए मन का चयना
    गाल गुलाबी अधर है लाल,
    देह चाँदनी ऐसी,
    जैसे कामरूप का जाल!

    सुंदर चित्रण.

    आभार.

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  15. हँसी तुम्हारी प्यारी इतनी
    जैसे धूप लगे अगहन की

    क्या बात है ....शुभकामनायें !

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  16. प्राकृतिक बिम्बों से सजी अच्छी कविता।

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    1. सुन्दर, ख़ूबसूरत भावाभिव्यक्ति .

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  17. खूबसूरती का सुन्दर चित्रण...आभार.

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  18. धीर जी आप कभी कभी बहुत कुछ याद दिला देते हो...
    हा हा हा..........

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  19. बहुत खूब। यह ब्लॉग मेरी पसंद का है। वाह!

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  20. आपने अपने मन की बात जरा धीरे' से कही.
    अच्छी लगी.

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