गुरुवार, 17 मई 2012

बदनसीबी,.....




बदनसीबी

मुझे जिन्दगी ने रुलाया बहुत है,
मेरे दोस्त ने आजमाया बहुत है!

कोई आ के देखे मेरे घर की रौनक,
मेरा घर गमो से सजाया बहुत है!

हटा लो ये आँचल मुझे भूल जाओ,

सर पे बदनसीबी का साया बहुत है!

घर तो क्या मै ये शहर छोड़ जाऊं,
अजीजो ने मुझको समझाया बहुत है!

बरकत बहुत दी है मुझको खुदा ने.
धीर ने खोयाहै कम,गम पाया बहुत है!

dheerendra,"dheer"

36 टिप्‍पणियां:

  1. बरकत बहुत दी है मुझको खुदा ने.
    धीर ने खोयाहै कम,गम पाया बहुत है! .... ग़म ना मिले तो असल ज़िन्दगी कहाँ .... बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल

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  2. न था हारा मैं धोखे औ बदनसीबी से
    सब हैं कमतर,इक अजीज़ ही बहुत है!

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  3. बहुत सुंदर गजल ..अच्छी प्रस्तुति .

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  4. आपको तो उर्दू और हिंदी दोनों ही में महारत हासिल है।

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  5. सुख साथ छोड़ जाता है, लेकिन दुःख तो अपना साथी है... बहुत सुन्दर ग़ज़ल... आभार

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. वाह क्या बात है...बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  8. कोई आ के देखे मेरे घर की रौनक,
    मेरा घर गमो से सजाया बहुत है!

    धीर भाई, आप अब अधीर क्यों होने लगे हैं । जिंदगी में जब तक गमों का आवागमन लगा रहेगा,तभी तो आप फुर्सत में अतीत में जिए हुए लमहों को जी पाएगें । इस दुमिया में कोई न कोई चीज ऐसी है जो हमें गम में भी एक सुखद सहारा दे देती है । आपके पोस्ट पर आना बहुत ही अच्छा लगा । धन्यवाद ।

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  9. वाह भाई जी |
    जबरदस्त भाव ||

    यूँ तो मुहब्बत किया जान देकर-
    मगर ख़ुदकुशी ने रुलाया बहुत है |

    अगर गम गलत कर न पाए हसीना-
    खिला गम को पानी पिलाया बहुत है ||

    दिखी तेरे होंठो पे अमृत की बूँदें -
    जिद्दी को तूने जिलाया बहुत है ||

    तड़पते तड़पते हुआ लाश रविकर-
    ज़रा ठोकरों से हिलाया बहुत है ||

    गाया गजल गुनगुनाया गुनाकर -
    सूना मर्सिया तुने गाया बहुत है ||

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  10. कोई आ के देखे मेरे घर की रौनक,
    मेरा घर गमो से सजाया बहुत है!
    ज़नाब धीर साहब दिल के तारों को साँसों की धौंकनी सरगम को सीधे छूती है यह ग़ज़ल .हर अशआर कीमती .बधाई स्वीकार करें .
    ram ram bhai
    शुक्रवार, 18 मई

    ऊंचा वही है जो गहराई लिए है
    शाश्वत सत्य यही है .

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  11. कोई आ के देखे मेरे घर की रौनक,
    मेरा घर गमो से सजाया बहुत है!

    ....बहुत खूब! बेहतरीन गज़ल....

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  12. बहुत ग़मगीन ग़ज़ल लिखी है दिल को छू गई

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  13. हटा लो ये आँचल मुझे भूल जाओ,
    सर पे बदनसीबी का साया बहुत है!

    घर तो क्या मै ये शहर छोड़ जाऊं,
    अजीजो ने मुझको समझाया बहुत है!
    प्रिय धीरेन्द्र जी सुन्दर गजल ...ये जिन्दगी हर कुछ दे जाती है जब गम न मिले तो परीक्षा कहाँ ?
    भ्रमर ५

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  14. bahut khoob sir
    Thanks
    http://drivingwithpen.blogspot.in/

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  15. घर तो क्या मै यह शहर छोड़ जाऊं
    अजीजों ने मुझको समझाया बहुत है "
    सुन्दर पंक्ति|अच्छी रचना के लिए बधाई |
    आशा

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  16. मन की पीड़ा को उकेरती भावपूर्ण रचना .........

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  17. बहुत अच्छे अच्छे से प्रयोग हैं इस ग़ज़ल में -- घर को ग़मों से सजाया बहुत है।

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  18. हटा लो ये आँचल मुझे भूल जाओ,
    सर पे बदनसीबी का साया बहुत है!
    बारहा पढने लायक ग़ज़ल .

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  19. बारहा पढने लायक ग़ज़ल .

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  20. बरकत बहुत दी है मुझको खुदा ने.
    धीर ने खोयाहै कम,गम पाया बहुत है!
    dil ko chhune wali bahut hi pyari gazal !

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  21. घर तो क्या मै ये शहर छोड़ जाऊं,
    अजीजो ने मुझको समझाया बहुत है!...

    Great couplets...

    .

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  22. कोई आ के देखे मेरे घर की रौनक,
    मेरा घर गमो से सजाया बहुत है!
    मुझे हादसों ने रुलाया बहुत है ,
    मेरा चैन छीनोगे अब तुम कभी न ,
    यकीन यह भी मुझको दिलाया बहुत है .बढ़िया प्रस्तुति दिल के तारों को झंकृत करती .
    यह बोम्बे मेरी जान (चौथा भाग )http://veerubhai1947.blogspot.in/

    तेरी आँखों की रिचाओं को पढ़ा है -
    उसने ,
    यकीन कर ,न कर .

    कृपया यहाँ भी पधारें -
    दमे में व्यायाम क्यों ?
    दमे में व्यायाम क्यों ?
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/05/blog-post_5948.html

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  23. अन्तेर्मन को छू गयी आप की रचना

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  24. सुन्दर अति सुन्दर जनाब!

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  25. उम्दा ग़ज़ल... बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

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  26. बरकत बहुत दी है मुझको खुदा ने.
    धीर ने खोया है कम,गम पाया बहुत है!
    ....bas man mein dheeraj ho to khone ka gam kam hota hai ..
    kabhi khushi aati hai to gam bhi aate hai ...
    bahut badiya

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  27. हुजूमे गम मेरी फितरत बदल नहीं सकते ,मैं क्या करूँ मुझे आदत है मुस्कुराने
    बढ़िया प्रस्तुति है -कुछ बात है कि हस्ती मिटटी नहीं हमारी ,बरसों रहा है दुश्मन दौरे जहां हमारा ......इसी विचार का विस्तार लिए है यह रचना ....


    ram ram bhai

    बुधवार, 30 मई 2012
    HIV-AIDS का इलाज़ नहीं शादी कर लो कमसिन से

    http://veerubhai1947.blogspot.in/

    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

    कब खिलेंगे फूल कैसे जान लेते हैं पादप ?

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